मेरी स्वरविज्ञान यात्रा: एक दैवीय संकेत।

बीस साल पहले मैने प्राणायाम ध्यान योग सिखा। प्राणायाम का पुरा खेल अपने सासोंकेद्वारा चलता है। मै इसका निरंतर अभ्यास करता आ रहा हु और मुझे पंद्रह साल पहले एक स्वरविज्ञान का ग्रंथ मेरे ट्रेन यात्रा के दौरान कोई एक बुढा व्यक्ति पढ रहा था। मैने थोडी देरके लिये वो ग्रंथ हाथ मे लिया और उसके अंदर के पन्ने खोलकर देख रहा था।

JV Satardekar

5/8/20241 min read